सिंगोली तहसील क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा स्कूल भवन क्षतिग्रस्त
सिंगोली(माधवीराजे)। बरसात के दिनों में जानलेवा साबित हो सकते हैं जीर्ण शीर्ण और क्षतिग्रस्त स्कूल भवन क्योंकि सिंगोली तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरकारी स्कूलों में लगभग एक दर्जन से ज्यादा क्षतिग्रस्त और जीर्ण शीर्ण स्कूलों के भवनों की जानकारी मिल रही है जिन्हें लेकर प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग अपनी कुम्भकर्णी नींद से जागकर ऐसे क्षतिग्रस्त भवनों की जानकारी मंगाई जा रही है एवं उनका उपयोग नहीं करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है।सूत्र बताते हैं कि कहीं शाला भवन क्षतिग्रस्त हो गया तो कहीं मध्यान्ह भोजन बनाने का शेड जीर्ण शीर्ण हो गया है तो कुछ स्कूलों के भवनों की छत जर्जर हालत में पहुँच गई है।कई स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं है कि बच्चों को आखिर बिठाया जाय तो कहाँ ?कमोबेश यही स्थिति मिड डे मील बनाये जाने वाले शेड की है।उल्लेखनीय है कि शिक्षकों के लिए स्कूल 1 जून से तो विद्यार्थियों के लिए 16 जून से ही स्कूल प्रारंभ हो गए थे तो प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग इतने दिनों तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे जबकि स्कूल भवनों की स्थिति तो पहले से ही सर्वविदित है।चूँकि अब बारिश का दौर शुरू हो गया है तो ऐसी स्थिति में न तो आनन फानन में नए स्कूल भवन का निर्माण किया जा सकता है और न ही अन्य विकल्प है तो समस्याओं का समाधान होगा कैसे ?मालवदर्शन द्वारा की गई पड़ताल में जानकारी मिल रही है कि सिंगोली तहसील क्षेत्र में अकेले झांतला संकुल के अंतर्गत आने वाले कई स्कूलों के भवन दयनीय स्थिति में आ चुके हैं जो खतरनाक स्थिति में होकर कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं जिनमें से प्राथमिक विद्यालय मेघपुरा गौड़ की पूरी छत खराब होकर यहाँ के कक्ष विद्यार्थियों को बिठाने लायक नहीं रहे वहीं प्राथमिक विद्यालय सुतारों की बड़ी स्कूल भवन की पूरी छत जर्जर हालत में होकर छत पर पानी भरा होने से पानी टपक रहा है यहाँ ऐसे हालात होने से बच्चों को बाहर खुले में बिठाया जा रहा है जबकि माध्यमिक विद्यालय शहनातलाई भवन की छत पूरी तरह से खराब हो गई है।यही हालत जूना पुराना स्कूल के किचन शेड की है।झांतला संकुल के ही ग्राम मेघपुरा चौहान के स्कूल में अतिरिक्त कक्ष की छत लटकी हुई है और किचन शेड की छत में कई छेद हो रहे हैं जिनसे पानी टपक रहा है।इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय मोटयार्ड़ा और प्राथमिक विद्यालय अथवांखुर्द स्कूल भवनों की छत भी पूरी तरह से जर्जर हालत में होकर छत से पानी टपक रहा है जबकि माध्यमिक विद्यालय पिपरवाँ में स्कूल भवन की खिड़की का छज्जा गिर गया है जिससे बरसात का पानी कक्ष में घुस रहा है।एक परिसर एक शाला वाले शासकीय हाईस्कूल थडोद में आने वाले माध्यमिक विद्यालय का भवन है जिसको डिस्मेंटल किया जाना चाहिए क्योंकि यह क्षतिग्रस्त होकर अनुपयोगी हो चुका है।इस प्रकार और भी कई स्कूल भवनों की कमोबेश यही स्थिति बताई जा रही है।ऐसे हालातों में सबसे ज्यादा दुविधा में यदि कोई है तो वह है सम्बंधित स्कूल का शिक्षक क्योंकि प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे आदेश जारी किए जा चुके हैं कि क्षतिग्रस्त भवनों का उपयोग नहीं किया जाए तो शिक्षक विद्यालय के संचालन के लिए विद्यार्थियों को बिठाएगा कहाँ और उन्हें पढ़ाएगा कैसे ? कुलमिलाकर बरसात का यह मौसम ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है।