नीमच। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून लाया गया है जिसको कांग्रेस ने काला कानून बताया है और इसमें किसानों की जमीन हड़पने की योजना भी बताई जा रही है उक्त संदर्भ के जानकारी देते हुए शनिवार को कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन पर कांग्रेस के नवनियुक्त प्रवक्ता समर सिंह मीडिया से रूबरू हुए इस दौरान उनके साथ नीमच जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौरसिया ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राकेश अहीर पार्षद महेंद्र मोनू लॉक्स योगेश प्रजापति और भगत वर्मा भी मौजूद रहे कांग्रेस के नवनियुक्त प्रवक्ता समर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा के शासनकाल में किसानों पर अत्याचार हो रहे हैं और उच्चतम अत्याचार मोहन सरकार कर रही है मोहन सरकार द्वारा रॉलेक्ट एक्ट जैसा काला कानून लाया गया है जिसमें किसानों की जमीन हड़पने की योजना बनाई गई है हकीकत में यह कानून किसने की जमीन छीन कर कॉरपोरेटर और रियल स्टेट लाबी को देने की योजना है इस कानून में सरकार किस से बिना पूछे उसकी जमीन ले सकती है किसानों को उनकी जमीन का कितना मुवाएजा मिलेगा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है यह तानाशाही का रास्ता है जिसको लेकर कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में किसने की जमीन की रक्षा के लिए कांग्रेस का हर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेगा हमारी मांग है कि इस किसान विरोधी कानून को तुरंत रद्द किया जाए ,2013 के कानून को पूरी तरह लागू किया जाए, सरकार को यदि विकसित जमीन का हिस्सा देना है तो कम से कम आधा हिस्सा दिया जाए और बेचने की पूरी छूट सुनिश्चित की जाए, बिना जनता की राय के कोई फैसला नहीं लिया जाए, अधिकारियों की जवाब देही तय की जाए, यदि सरकार मांगे नहीं मानती है तो कांग्रेस जागरूकता अभियान चलाएगी जिसमें किसान रैली ट्रैक्टर रैली चौपाल सभाएं प्रभात फेरी सहित कई आंदोलन कांग्रेस के द्वारा किए जाएंगे। इसी प्रकार उज्जैन से हस्त को लेकर भी भाजपा की मोहन सरकार किसने की जमीन हड़पने की योजना बना रही है जिसमें स्थाई मेले की व्यवस्था की जानी है जिसको लेकर मेला क्षेत्र के एरिया के किसानों की जमीन अधिग्रहण होगी और उन पर पक्का निर्माण संत कुटिया दुकान सहित अन्य चीज बनाई जाएगी ऐसे में मेला समाप्ति के बाद उक्त व्यवस्थाएं किसी काम की नहीं रहेगी और बाद में यही सरकार भू माफियाओं को उन्हें पौने दावों में जमीन बेच देगी विचारणीय प्रश्न यह है कि सिहस्त का मेला हर 12 साल में आता है ऐसी स्थिति में क्या साधु सन्यासी उक्त स्थान पर ही रहेंगे यह संभव नहीं है।