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बांग्लादेश में दीपू दास पर अत्याचार के विरोध में सर्व हिन्दू समाज का आक्रोश,बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन कर राष्ट्रपति के नाम सोपा ज्ञापन

नीमच। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू युवक दीपू दास के साथ हुई निर्मम, अमानवीय एवं निंदनीय घटना के विरोध में नीमच में सर्व हिन्दू समाज द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस घटना से आहत एवं आक्रोशित हिन्दू समाज ने पहले बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन कर अपना रोष प्रकट किया, तत्पश्चात भारत सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।यह ज्ञापन कलेक्टर प्रतिनिधि एवं नायब तहसीलदार संजय मालवीय को सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि बांग्लादेश में दीपू दास के साथ हुई घटना न केवल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है, बल्कि वहां रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। ऐसी घटनाएं मानवता, सभ्यता और लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विपरीत हैं तथा क्षेत्रीय शांति और सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं।सर्व हिन्दू समाज ने ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति से करबद्ध निवेदन किया कि भारत सरकार, कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश सरकार से प्रभावी संवाद स्थापित कर इस मामले में हस्तक्षेप करे। ज्ञापन में प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी गईं—घटना की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बांग्लादेश में लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के साथ हो रहे अत्याचार चिंताजनक हैं। यदि समय रहते इन घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक दबाव नहीं बनाया गया, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। उन्होंने भारत सरकार से अपेक्षा जताई कि वह पड़ोसी देश में रहने वाले हिन्दुओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ठोस पहल करे।इस अवसर पर सर्व हिन्दू समाज के वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिक, युवा वर्ग तथा विभिन्न हिन्दू संगठनों के दायित्ववान पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को सजा दिलाने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।सर्व हिन्दू समाज ने मांग की है कि महामहिम राष्ट्रपति इस गंभीर विषय पर पूर्ण संवेदनशीलता एवं संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप उचित कार्यवाही हेतु भारत सरकार अपना हस्तक्षेप करें।

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